सक्षम जौनपुर का अनूठा ‘समावेशी रक्षाबंधन’ — सृजन संस्था में बच्चों ने बांधा प्रेम और विश्वास का धागा
जौनपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सृजन संस्था, सुंगुलपुर (कुल्हनामऊ) में उस समय भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब दिव्यांग बच्चों ने रक्षासूत्र बांधकर समाज को समानता, संवेदना और अपनत्व का संदेश दिया। अवसर था दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं सेवा के लिए समर्पित राष्ट्रीय संगठन ‘सक्षम’ (समदृष्टि, क्षमताविकास एवं अनुसंधान मंडल), जिला जौनपुर (काशी प्रांत) द्वारा आयोजित ‘समावेशी रक्षाबंधन’ कार्यक्रम का।
कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने सक्षम के पदाधिकारियों एवं अतिथियों को रक्षासूत्र बांधा। जैसे ही बच्चों ने अपनी नन्हीं उंगलियों से रक्षासूत्र बांधा, पूरा वातावरण आत्मीयता और खुशी से भर उठा। बच्चों के चेहरों पर दिखाई दे रही मुस्कान ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
सक्षम के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा करते हुए उन्हें उपहार एवं मिष्ठान वितरित किए। इस दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बना। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि दिव्यांग बच्चे समाज से अलग नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें भी समान प्रेम, सम्मान एवं अवसर मिलना चाहिए।
‘बच्चों की मुस्कान ही पर्व की सच्ची सार्थकता’
सक्षम जौनपुर के जिला अध्यक्ष डॉ. उत्तम गुप्ता ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ही रक्षाबंधन पर्व की वास्तविक सार्थकता है। संगठन दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।
सृजन संस्था के संस्थापक डॉ. संजय मिश्रा ने सक्षम संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ समाज में समावेश और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करते हैं।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में सक्षम जौनपुर के जिला अध्यक्ष डॉ. उत्तम गुप्ता, जिला सचिव विक्रांत, धीमही प्रकोष्ठ प्रमुख डॉ. साधना मौर्य, युवा प्रमुख किशन जी, सृजन संस्था के संस्थापक डॉ. संजय मिश्रा सहित संस्था की पूरी शैक्षिक टीम की सहभागिता रही।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि रक्षाबंधन का धागा केवल कलाई पर नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ता है। दिव्यांग बच्चों के साथ मनाए गए इस समावेशी पर्व ने समाज में प्रेम, समानता और मानवीय संवेदना की नई मिसाल पेश की।