जौनपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जारी नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को ब्राह्मण एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। परिषद के अध्यक्ष पंकज शुक्ला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
परिषद के अध्यक्ष ने यूजीसी के नए नियमों को एकपक्षीय बताते हुए कहा कि इनमें झूठी शिकायतों के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। उनका दावा है कि इन प्रावधानों के चलते सामान्य एवं अन्य वर्गों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों में असुरक्षा तथा असंतोष का माहौल बन रहा है। परिषद ने मांग की कि इन नियमों को पूरी तरह वापस लिया जाए अथवा इन्हें वर्ग-निरपेक्ष बनाया जाए, ताकि सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समान सुरक्षा एवं अधिकार मिल सकें।
एससी-एसटी अधिनियम के दुरुपयोग पर रोक की मांगप्रदर्शन के दौरान परिषद ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की भी मांग उठाई। परिषद का कहना है कि कानून का राजनीतिक अथवा व्यक्तिगत स्तर पर दुरुपयोग रोकने के लिए संवैधानिक दायरे में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।
परिषद ने मांग की कि किसी शिकायत के आधार पर सीधे मुकदमा दर्ज करने या गिरफ्तारी की कार्रवाई से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। इससे निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानी से बचाने के साथ-साथ कानून की निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांगज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ के प्रावधान को सख्ती से लागू करने की मांग भी शामिल रही। परिषद ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत भी क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ समाज के वास्तविक रूप से पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
परिषद ने भविष्य में आरक्षण की व्यवस्था का आधार केवल जाति के बजाय आर्थिक और सामाजिक आवश्यकता को बनाए जाने का सुझाव दिया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार को सभी वर्गों के जरूरतमंद लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और शासन-प्रशासन से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
जौनपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जारी नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को ब्राह्मण एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। परिषद के अध्यक्ष पंकज शुक्ला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
परिषद के अध्यक्ष ने यूजीसी के नए नियमों को एकपक्षीय बताते हुए कहा कि इनमें झूठी शिकायतों के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। उनका दावा है कि इन प्रावधानों के चलते सामान्य एवं अन्य वर्गों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों में असुरक्षा तथा असंतोष का माहौल बन रहा है। परिषद ने मांग की कि इन नियमों को पूरी तरह वापस लिया जाए अथवा इन्हें वर्ग-निरपेक्ष बनाया जाए, ताकि सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समान सुरक्षा एवं अधिकार मिल सकें।
एससी-एसटी अधिनियम के दुरुपयोग पर रोक की मांग
प्रदर्शन के दौरान परिषद ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की भी मांग उठाई। परिषद का कहना है कि कानून का राजनीतिक अथवा व्यक्तिगत स्तर पर दुरुपयोग रोकने के लिए संवैधानिक दायरे में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।
परिषद ने मांग की कि किसी शिकायत के आधार पर सीधे मुकदमा दर्ज करने या गिरफ्तारी की कार्रवाई से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। इससे निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानी से बचाने के साथ-साथ कानून की निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग
ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ के प्रावधान को सख्ती से लागू करने की मांग भी शामिल रही। परिषद ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत भी क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ समाज के वास्तविक रूप से पिछड़े और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
परिषद ने भविष्य में आरक्षण की व्यवस्था का आधार केवल जाति के बजाय आर्थिक और सामाजिक आवश्यकता को बनाए जाने का सुझाव दिया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार को सभी वर्गों के जरूरतमंद लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और शासन-प्रशासन से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की।