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केले की खेती ने बदली किस्मत, प्रेमलता बनीं महिला किसानों की मिसाल

Jan Dhamaka Times

 

एकीकृत बागवानी विकास मिशन से मिला सरकारी अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन, 0.8 हेक्टेयर में खेती से करीब ₹5 लाख की शुद्ध बचत

जौनपुर, 1 सितम्बर। विकासखंड बदलापुर के ग्राम गजेंद्रपुर निवासी श्रीमती प्रेमलता पत्नी श्री भूप नारायण सिंह ने मेहनत, वैज्ञानिक तकनीक और सरकारी सहयोग के बल पर केले की व्यावसायिक खेती में सफलता की नई कहानी लिखी है। उद्यान विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन का लाभ उठाकर उन्होंने 0.8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की खेती को आर्थिक समृद्धि का माध्यम बनाया।

दो वर्षों में मिला ₹32,783 का अनुदान

वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्रीमती प्रेमलता को मिशन के अंतर्गत 0.8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले के रोपण के लिए ₹24,590 का अनुदान प्रदान किया गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में द्वितीय वर्ष के लिए ₹8,193 का अनुदान उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार योजना के तहत उन्हें कुल ₹32,783 का सरकारी अनुदान प्राप्त हुआ।

अनुदान के साथ मिला तकनीकी प्रशिक्षण

योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता के साथ श्रीमती प्रेमलता को केले की खेती के संबंध में प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और विभागीय मार्गदर्शन भी मिला। प्रशिक्षण में मिली जानकारी को उन्होंने अपने खेत में प्रभावी ढंग से लागू किया। पौधों का उचित प्रबंधन, समयबद्ध सिंचाई, खाद एवं उर्वरकों का संतुलित प्रयोग तथा फसल की वैज्ञानिक देखभाल पर विशेष ध्यान दिया।


₹1.50 लाख लागत, करीब ₹5 लाख की शुद्ध बचत

केले की खेती में रोपण, सिंचाई, खाद-उर्वरक, फसल प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों पर उनकी कुल लागत करीब ₹1.50 लाख आई। वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन के परिणामस्वरूप उन्हें अच्छी पैदावार मिली। उत्पादित केले की बिक्री से उन्होंने करीब ₹5 लाख की शुद्ध बचत अर्जित की।

आसपास के किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

श्रीमती प्रेमलता की सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ, तकनीकी प्रशिक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक बागवानी फसलों से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

उनकी सफलता से ग्राम गजेंद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों के किसान भी केले सहित अन्य व्यावसायिक बागवानी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। प्रेमलता की यह उपलब्धि महिला किसानों के सशक्तिकरण, आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।



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