सेवा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित, पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
आजमगढ़। पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को बढ़ावा देने तथा उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के अंतर्गत सेवा संकल्प अभियान के तहत उद्घाटन एवं टूलकिट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में चयनित कारीगरों एवं शिल्पकारों को उनके कार्य से संबंधित टूलकिट वितरित की गई।
टूलकिट प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों के चेहरे पर खुशी नजर आई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों के कौशल को प्रोत्साहित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना महत्वपूर्ण पहल है। योजना के माध्यम से कारीगरों को उनके कार्य के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे अपने पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक संसाधनों के साथ आगे बढ़ा सकें।
पारंपरिक से आधुनिक ट्रेड तक कारीगरों को लाभ
कार्यक्रम में बताया गया कि योजना के तहत कुम्हार, लोहार, राजमिस्त्री, टोकरी बुनकर, दर्जी, मोची, नाई सहित विभिन्न पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों को लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही आधुनिक ट्रेड से जुड़े पात्र लाभार्थियों को भी योजना का लाभ दिए जाने की जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय और बाजार की आवश्यकताओं को देखते हुए कारीगरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधनों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
टूलकिट का अधिकतम उपयोग करने की अपील
अधिकारियों ने लाभार्थियों से अपील की कि उन्हें उपलब्ध कराई गई टूलकिट का अधिकतम उपयोग करते हुए अपने हुनर को और विकसित करें तथा स्वरोजगार को मजबूत बनाएं। वक्ताओं ने कहा कि कौशल और आधुनिक संसाधनों का बेहतर समन्वय कारीगरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में उपायुक्त उद्योग आजमगढ़ आशुतोष श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल तथा जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन लाभार्थी कारीगरों को आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने और अपने हुनर को रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने के लिए प्रेरित करते हुए किया गया।