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यादों के गजरे कुम्हलाये, आप न आये आप ना आये

Jan Dhamaka Times


जनपद  जौनपुर ।कालजयी रचनाकार ,पत्रकार पं0 रूपनारायण त्रिपाठी की 36वीं   पुण्य स्मृति को समर्पित ‘‘गीत रूप नमन समारोह‘‘  के अवसर पर   कवि सम्मेलन एवं गीत रूप नमन समारोह उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ एवं रूप सेवा संस्थान जगतगंज  के संयुक्त तत्वाधान मे जगत नारायण इण्टर काजेज जगतगंज में  आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत   मानस मर्मज्ञ डाॅ आरपी ओझा के व्याख्यान से हुआ। उन्होने मानसकृत गोस्वामी तुलसीदास जी के श्रीरामचरितमानस पर  प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से स्व0 त्रिपाठी के मुक्तकों को उससे जोड़ते हुए सस्वर अद्भुत स्वरूप प्रस्तुत किया।   जिलाधिकारी डा0 दिनेश चन्द्र सिंह ने कहा कि साहित्यिक योगदान से उन्होने पूरे हिन्दी जगत को गौरवान्वित किया। वे उस ऊॅचाई पर पहुॅचे जहाॅ कोई बिरला ही पहुॅच पाता है। उनकी रचनाएं सार्वभौमिक सर्वकालिक है। उनकी रचनाओ मे भारतीय सनातन संस्कृति के मूल्य निहित है।   कवि सम्मेलन का शुभारम्भ प्रयागराज से पधारे डा0 श्लेष गौतम के वाणी वन्दना से हुई एवं उनकी कविता- लिखा था रह जायेगा रहता नही शशीर इसीलिये मरते नही तुलसी,सूर, कबीर सराही गयी। विनम्रसेन सिंह (प्रयागराज) ने ‘‘तरूणाई पर डगमग मन चंचल मधु छाया है। गीत का ये मौसम है अब बसन्त आया है’’ से ’’मधुमास का रंग बिखेरा’’ वीर रस ओज के यशस्वी कवि अतुल वाजपेयी (लखनऊ) ने बल-बुद्धि पराक्रम के सागर, जिनके आयुष धनु सायक है।  कलकत्ता से पधारे कवि डा0 सुशील साहिल ने बढ़ने लगे तरंग तो हमसे मिला करो, मन में उठे उमंग तो हमसे मिला करो। अंगरेजी देशी पौवा गटकने के बाद भी पानी से अगर हो भंग तो मुझसे मिला करो। जैसी कविताओं से लोगों को फागुन में रंग दिया। व्यग्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने बीच-बीच में अपनी कविताओं से हास्य की छटा विखेरी। देश के शीर्षस्थ रचनाकार डा0 वुद्धिनाथ मिश्र ने यादों के गजरे कुम्हलाये, आप न आये। यह अमराई कौन अगोरे, अब तो हुए हैं भार टिकोरे, अंग-अंग महुआ गदरायें, आप न आये गीत से बिरहिणी नायिका की मनादेशा कर सजीव चित्रण किया।    अध्यक्षता पूर्व कुलपति शिक्षाविद् प्रो0 राममोहन पाठक ने किया, संचालन श्लेष गौतम ने किया।   संरक्षक राम कृष्ण त्रिपाठी, प्रो0 मनोज मिश्र, एवं सचिव लोकेश त्रिपाठी आभार द्वारा स्मृतिचिन्ह एवं अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।


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