शंकराचार्य जी ने अपने संदेश में कड़े शब्दों में कहा है कि:
"यदि शासन के दावे सत्य हैं, तो इस अनुमति को प्रदान करने में कुछ क्षण का भी विलंब नहीं होना चाहिए। अनुमति न देना इस बात का स्वतः प्रमाण होगा कि पशुपालन मंत्री का वक्तव्य केवल सत्य पर पर्दा डालने का एक प्रयास मात्र है।"
शंकराचार्य जी का मानना है कि गो-वंश की रक्षा केवल कागजी आंकड़ों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए। यदि शासन सहयोग करता है, तो दूध का दूध और पानी का पानी होने में समय नहीं लगेगा।
