मध्यप्रदेश जनपद सागर स्थित रुद्राक्षधाम आश्रम में आयोजित 7 दिवसीय रामकथा में प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि दक्षिण मुखी हनुमानजी के प्राण प्रतिष्ठा के पावन उत्सव पर राम रसिया हनुमान जी को रामकथा सुनाने आया हूँ। जय श्रीराम अब देश का संसदीय मंत्र हो चुका है।अतः सर्वकाल श्रद्धा पूर्वक कथा श्रवण करना चाहिए।कथा के लिए हृदय में श्रद्धा होनी चाहिए इसके बिना कथा सुलभ नही होती ।कैलास से निकली रामकथा नीचे न आकर ऊपर चढ़ती चली गयी प्रयाग होते हुए यह कथा काशी जी चली गयी।कथा भजन पुराण आदि एक बार ही नही बारंबार सुनना और सुनाना चाहिए।विभिन्न मत के लोगों को ठीक करने की कोशिश न करते हुए स्वयं को व्यवस्थित करना चाहिए।कथा श्रवण करने वाला कुसंगी भी सत्संगी हो जाता है।दुःख पुंजों का नाश करके जीवन को सुख प्रदान करती है।गंगा जी की भाँति रामकथा गंगा भी जीव को जीवंतता प्रदान करके मंगल करती है।भगवान शरणागत की रक्षा की टेक रखी है।भगवान की शरण मे अत्यान्तिक पुण्यशाली ही आ सकता है।
प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने रामकथा प्रवाह में कहा कि सुंदरकांड करने वाले आजकल बहुत हो गए हैं जबकि हनुमान जी को सुंदरकांड नही पसंद हैं उन्हें रामनाम से प्रेम है उनको सम्पूर्ण रामचरितमानस सुनाना चाहिए।सुंदरकांड हनुमान जी के लीला महोत्सव की कथा है और कोई भी विवेकी व्यक्ति आत्म प्रशंसा नही सुनता।कृपा भगवान का स्वभाव है वे जिसके आचार व्यवहार से गदगद हो जाते हैं उसपर कृपा अवश्य करते हैं।प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज संदेश देते हुए कहा कि आहरण वृत्ति का पोषक रावण कभी पूजनीय नही हो सकता क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति त्याग की संस्कृति है।ब्राह्मण का अपमान सर्वदा विनाशकारी होता है।अतः इससे बचना चाहिए।रामकथा के प्रसंगों का गान करते हुए पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने राम राज्याभिषेक के साथ अपनी रामकथा को विश्राम प्रदान किया।
30वर्षो की रामकथा गायन यात्रा में उन्होंने स्वयं दर्जनों भजनों की रचना भी किया। देश के कुछ विख्यात चिकित्सकों का ऐसा मानना है है कि प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के प्रवचनों और भजनों को सुनने वाले रोगी को अल्पकालीन चिकित्सीय सेवा से स्वास्थ्य लाभ होने लगता है।
लालशेखर सिंह-ब्यूरो

