जनपद जौनपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान ने कहा है कि वह 22 जुलाई 2026 को रामपुर जाकर जौहर यूनिवर्सिटी में चल रहे छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होंगे तथा विद्यार्थियों के संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शैक्षिक अधिकारों के समर्थन में अपनी एकजुटता व्यक्त करेंगे।
उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक उत्थान और लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस विषय का समाधान जनभावनाओं का सम्मान करते हुए, संविधान और कानून के दायरे में संवाद तथा न्यायपूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षा, विधि के शासन और सार्वजनिक हित—तीनों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने संबंधी आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इस मुद्दे पर व्यापक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान से जुड़े विवाद का समाधान दमनात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद, न्याय और संवैधानिक प्रक्रिया से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि भवन मानचित्र अथवा अन्य औपचारिकताओं में कोई कमी पाई गई है और कानून उसके नियमितीकरण अथवा कंपाउंडिंग का प्रावधान देता है, तो शिक्षा और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए उन्हीं वैधानिक उपायों को अपनाया जाना चाहिए। प्रशासन का दायित्व केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करना भी है।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि जब जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना और निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था, उस समय संबंधित विकास प्राधिकरण का अस्तित्व नहीं था। इसलिए अधिकार-क्षेत्र तथा विधिक प्रक्रियाओं से जुड़े सभी पहलुओं का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार का निर्णय न्यायसंगत और तथ्यपरक हो।
उन्होंने कहा कि संविधान का मूल उद्देश्य न्याय, समान अवसर और शिक्षा को बढ़ावा देना है। शिक्षा के मंदिरों को बचाना और विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में मोहम्मद अरशद खान ने माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय प्रयागराज, मानवाधिकार आयोग तथा जिला प्रशासन रामपुर से आग्रह किया कि जनभावनाओं, शिक्षा के महत्व तथा संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करते हुए संबंधित आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसा न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए जिससे विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे तथा जौहर यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक वातावरण बाधित न हो।
