वरासत दर्ज करने के नाम धन उगाही और धन न मिलने पर वारिस के ही खिलाफ असहमति रिपोर्ट
जनपद जौनपुर। तहसील सदर के अंतर्गत ग्राम विजय मंदिर उर्फ प्रेमराजपुर में राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित निखलेश बिन्द ने जिलाधिकारी को साक्ष्यों के साथ प्रार्थना पत्र सौंपकर लेखपाल पर भ्रष्टाचार और गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाया है। दस्तावेजों के अनुसार, कन्हैया लाल बिन्द के वारिसों के रूप में कमलेश कुमार (31 वर्ष) और निखलेश बिन्द (28 वर्ष) का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया गया था। यह मामला गाटा संख्या 330मि, 332/2, 332मि और 337मि से जुड़ा है। नियमों के अनुसार, पिता की मृत्यु के बाद बेटों का नाम वरासत के रूप में दर्ज होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन लेखपाल की रिपोर्ट में जानबूझकर वारिसों के आगे असहमति दर्ज कर दिया गया है।निखलेश का आरोप है कि लेखपाल विनय दुबे ने वरासत दर्ज करने के बदले अनुचित लाभ की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर लेखपाल ने अपनी जांच आख्या में मामले को विवादित्य श्रेणी में डाल दिया। पोर्टल के स्टेटस में साफ दिख रहा है कि लेखपाल की जांच आख्या में बिना किसी ठोस कारण के इसे विवादित दिखाया गया है, जिससे वारिसों का हक मारा जा रहा है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि लेखपाल द्वारा लगाई गई गलत श्विवादित्य रिपोर्ट को निरस्त किया जाए।गाटा संख्या 330, 332 और 337 पर वारिसों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। पद का दुरुपयोग करने वाले संबंधित लेखपाल के खिलाफ विभागीय जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग में निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है, जहाँ वारिसों को भी अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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