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राम सीता जी का जीवन मर्यादा का सबसे बड़ा उदहारण है

Jan Dhamaka Times


जौनपुर महराजगंज क्षेत्र के सवंसा हनुमान मंदिर पर चल रही श्री राम कथा के दौरान वाराणसी की धरती से पधारे कथा व्यास अनिल पाण्डेय द्वारा श्री राम जी का विवाह बड़े ही मार्मिक ढंग से सुनाया गया उन्होंने बताया कि मान्यता है कि सीता का जन्म धरती से हुआ था। राजा जनक हल चला रहे थे उस समय उन्हें एक नन्ही सी बच्ची मिली थी जिसका नाम उन्होंने सीता रखा था। सीता जी को “जनकनंदिनी” के नाम से भी पुकारा जाता है।एक बार सीता ने शिव जी का धनुष उठा लिया था जिसे परशुराम के अतिरिक्त और कोई नहीं उठा पाता था। राजा जनक ने यह निर्णय लिया कि जो भी शिव का धनुष उठा पाएगा सीता का विवाह उसी से होगा।   

सीता के स्वयंवर के लिए घोषणाएं कर दी गई। स्वयंवर में भगवान राम और लक्ष्मण ने भी प्रतिभाग किया। वहां पर कई और राजकुमार भी आए हुए थे पर कोई भी शिव जी के धनुष को नहीं उठा सका।राजा जनक हताश हो ' तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया।इस प्रकार सीता जी का विवाह राम से हुआ। भारतीय समाज में राम और सीता को आदर्श दंपत्ति का उदाहरण समझा जाता है। राम सीता का जीवन प्रेम, आदर्श, समर्पण और मूल्यों को प्रदर्शित करता है। वही कथा के दौरान पहुंचे क्षेत्रीय विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने भी कथा श्रवण कर कथा व्यास से आशीर्वाद लिया वहीं मंच से पंडाल को ठंड और बारिश से बचने के लिए भव्य बनवाने का वादा किया मंच का कुशल संचालन शुभम काशी द्वारा किया गया वहीं सभी आगंतुकों के प्रति पूर्व मंडल अध्यक्ष यादवेंद्र प्रताप सिंह लवकुश ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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